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Автор Тема: Праздник Дипавали в Москве, 30 октября  (Прочитано 334 раз)

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Atmanath

  • Практикующий
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Адеш!
30 октября (воскресенье) в Москве пройдет празднование праздника Дипавали  suns



Дипавали (или Дивали) – один из самых главных индийских праздников в честь Лакшми – богини богатства, счастья и духовной гармонии. Празднуется в течение 5 дней, но самым главным считается третий день. В ночь новолуния в храмах, домах, на улицах и площадях – повсюду зажигается множество огней в знак победы сил света и истины над силами тьмы и невежества. Повсеместно проводятся пуджи Богине Лакшми, которая при искреннем к ней отношении может одарить не только материальными благами, но и духовными – мудростью, внутренней силой и знанием.

В программе праздника: почитание Богини Лакшми, джапа, медитация, общение и чаепитие.

Начало мероприятия: 18:00

Стоимость: 1000 рублей

Запись на мероприятие и вопросы: natha.seminar@gmail.com
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Yogi Matsyendranatha

  • Гуру
  • *****
  • Сообщений: 6202
    • Традиция натхов
Re: Праздник Дипавали в Москве, 30 октября
« Ответ #1 : Октябрь 29, 2016, 13:10:32 »

Поздравляю всех учеников с Дипавали Махотсавой.

श्रीमहालक्ष्मी ललितास्तोत्रम् ॥

ध्यानम् ॥चक्राकारं महत्तेजः तन्मध्ये परमेश्वरी ।
जगन्माता जीवदात्री नारायणी परमेश्वरी ॥ १ ॥
व्यूहतेजोमयी ब्रह्मानन्दिनी हरिसुन्दरी ।
पाशांकुशेक्षुकोदण्ड पद्ममालालसत्करा ॥ २ ॥
दृष्ट्वा तां मुमुहुर्देवाः प्रणेमुर्विगतज्वराः ।
तुष्टुवुः श्रीमहालक्ष्मीं ललितां वैष्णवीं पराम् ॥ ३
श्रीदेवाः ऊचुः ॥जय लक्ष्मि जगन्मातः जय लक्ष्मि परात्परे ।
जय कल्याणनिलये जय सर्वकलात्मिके ॥ १ ॥
जय ब्राह्मि महालक्ष्मि ब्रहात्मिके परात्मिके ।
जय नारायणि शान्ते जय श्रीललिते रमे ॥ २ ॥
जय श्रीविजये देवीश्वरि श्रीदे जयर्द्धिदे ।
नमः सहस्र शीर्षायै सहस्त्रानन लोचने ॥ ३ ॥
नमः सहस्रहस्ताब्जपादपङ्कजशोभिते ।
अणोरणुतरे लक्ष्मि महतोऽपि महीयसि ॥ ४ ॥
अतलं ते स्मृतौ पादौ वितलं जानुनी तव ।
रसातलं कटिस्ते च कुक्षिस्ते पृथिवी मता ॥ ५ ॥
हृदयं भुवः स्वस्तेऽस्तु मुखं सत्यं शिरो मतम् ।
दृशश्चन्द्रार्कदहना दिशः कर्णा भुजः सुराः ॥ ६ ॥
मरुतस्तु तवोच्छ्वासा वाचस्ते श्रुतयो मताः ।
क्रिडा ते लोकरचना सखा ते परमेश्वरः ॥ ७ ॥
आहारस्ते सदानन्दो वासस्ते हृदयो हरेः ।
दृश्यादृश्यस्वरूपाणि रूपाणि भुवनानि ते ॥ ८ ॥
शिरोरुहा घनास्ते वै तारकाः कुसुमानि ते ।
धर्माद्या बाहवस्ते च कालाद्या हेतयस्तव ॥ ९ ॥
यमाश्च नियमाश्चापि करपादनखास्तव ।
स्तनौ स्वाहास्वधाकारौ सर्वजीवनदुग्धदौ ॥ १० ॥
प्राणायामस्तव श्वासो रसना ते सरस्वती ।
महीरुहास्तेऽङ्गरुहाः प्रभातं वसनं तव ॥ ११ ॥
आदौ दया धर्मपत्नी ससर्ज निखिलाः प्रजाः ।
हृत्स्था त्वं व्यापिनी लक्ष्मीः मोहिनी त्वं तथा परा ॥ १२ ॥
इदानीं दृश्यसे ब्राह्मी नारायणी प्रियशङ्करी ।
नमस्तस्यै महालक्ष्म्यै गजमुख्यै नमो नमः ॥ १३ ॥
सर्वशक्त्यै सर्वधात्र्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ।
या ससर्ज विराजं च ततोऽजं विष्णुमीश्वरम् ॥ १४ ॥
रुदं तथा सुराग्रयाँश्च तस्यै लक्ष्म्यै नमो नमः ।
त्रिगुणायै निर्गुणायै हरिण्यै ते नमो नमः ॥ १५ ॥
यन्त्रतन्त्रात्मिकायै ते जगन्मात्रे नमो नमः ।
वाग्विभूत्यै गुरुतन्व्यै महालक्ष्म्यै नमो नमः ॥ १६ ॥
कम्भरायै सर्वविद्याभरायै ते नमो नमः ।
जयाललितापाञ्चाली रमातन्वै नमो नमः ॥ १७ ॥
पद्मावतीरमाहंसी सुगुणाऽऽज्ञाश्रियै नमः ।
नमः स्तुता प्रसनैवंछन्दयामास सव्दरैः ॥ १८ ॥
॥ फल श्रुति श्री लक्ष्मी उवाच ॥
स्तावका मे भविश्यन्ति श्रीयशोधर्मसम्भृताः ।
विद्याविनयसम्पन्ना निरोगा दीर्घजीविनः ॥ १ ॥
पुत्रमित्रकलत्राढ्या भविष्यन्ति सुसम्पदः ।
पठनाच्छ्रवणादस्य शत्रुभीतिर्विनश्यति ॥ २ ॥
राजभीतिः कदनानि विनश्यन्ति न संशयः ।
भुक्तिं मुक्तिं भाग्यमृद्धिमुत्तमां च लभेन्नरः ॥ ३ ॥
॥ श्रीलक्ष्मीनारायणसंहितायां देवसङ्घकृता श्रीमहालक्ष्मीललितास्तोत्रम् ॥
Записан
На общие вопросы я не отвечаю в ЛС, ответы на них даю только на форуме. Просьба относиться с пониманием.